पत्रकार योमाना अल सईद यदि चाहतीं तो हमले के तुरंत बाद वहां से जा सकती थीं, लेकिन उन्होंने अपनी ड्यूटी निभाना ज्यादा जरूरी समझा. योमाना की तरह ही बाकी पत्रकारों को भी इजरायल और फिलिस्तीन की इस जंग में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
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